मेहसौल के फ्लाईओवर का इतिहास "सीतामढ़ी विकास स्तंभ"
रामसेतु का नाम जानते होंगे. लंका पर चढ़ाई के लिए इंजीनियर नल-नील जो पुल बनाया था. रामेश्वरम से श्रीलंका के बीच में. इसका साक्ष्य अभियो मिलता है. इसका अवशेष आजो बचा हुआ है. अब काहे कि ई समंदर में पानी के भीतर है इसलिए इसको टूरिस्ट प्लेस नहीं बनाया जा सकता. थोड़ा खतरा है इसमें.🗺🏔
रामायण काल से जुड़ा और एगो और निर्माण के बारे में हम आपको बताते हैं. ई आपको कोई पत्रकार आ इतिहासकार नहीं बताएगा. त्रेता जुग में मिथिला में महिसौल नाम का जगह हुआ करता था. सीता माता की जन्मस्थली से कोस-दो कोसभर की दूरी पर. प्रभु श्रीराम का बारात अयोध्या से निकलने वाला था. बारात में चतुरंगिणी सेना के साथ सैंकड़ो हाथी-घोड़ा भी चला. इतना विशाल बारात कइसे जाएगा..! महिसौल नगरी के वासियों को कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए. ई सब बात सोच के त्रेता जुग में महिसौल नगरी में उड़ानपुल बनाया गया. इसी उड़ानपुल से प्रभु श्रीराम का बारात गया और वापसी में जनकपुर धाम से माता सीता का विदाई हुआ.🐘🐎💂🏻♀
त्रेता जुग का उसी महिसौल को कलजुगहा सब "मेहसौल" के नाम से जानता है. और सीतामढ़ी नगरिया का अंग्रेज़ी पढ़ल-लिखल पब्लिक उड़ानपुल को "फ्लाईओवर" कहने लगा. इस "मेहसौल चौक" पर आजो उस उड़ानपुल का अवशेष बचा हुआ है. जानकी महोत्सव में इस पुल के अवशेष को देखने के लिए सीतामढ़ी में भारत के कोना-कोना से श्रद्धालु आते हैं. आम दिन में भी इस पुल के पास हजारों के संख्या में भीड़ देखा जा सकता है. भला हो सीतामढ़ी नगरीया के माननीय जनप्रतिनिधि महोदय सब का, जिनके कृपा से उस उड़ानपुल का अवशेष आजो सुरक्षित बचा हुआ है. हमारा पौराणिक-ऐतिहासिक विरासत बचा कर रखने के लिए हम जनप्रतिनिधि महोदय सबका पूरे सीतामढ़ी जिला की तरफ से आभार व्यक्त करते हैं..🙏🏻💐
हमारे विचार से इस पुल को चारों तरफ से अच्छे से घेराबंदी करके, चन्दन-टीका-अगरबत्ती लगाकर टूरिस्ट प्लेस बना देना चाहिए. हमारे दादा-परदादा बताते हैं कि इस उड़ानपुल में लाल चंदन लगाकर लाल कपड़ा बांधने से सारा मन्नत पूरा होता है. हम तो कल ही जा रहें हैं दर्शन करने आ मन्नत मांगने. बाकी आप सब अपना देख लीजिए. बोलिए सियावर रामचन्द्र की जय. महिसौल नगरिया के उड़ानपुल की जय.🙏
रामसेतु का नाम जानते होंगे. लंका पर चढ़ाई के लिए इंजीनियर नल-नील जो पुल बनाया था. रामेश्वरम से श्रीलंका के बीच में. इसका साक्ष्य अभियो मिलता है. इसका अवशेष आजो बचा हुआ है. अब काहे कि ई समंदर में पानी के भीतर है इसलिए इसको टूरिस्ट प्लेस नहीं बनाया जा सकता. थोड़ा खतरा है इसमें.🗺🏔
रामायण काल से जुड़ा और एगो और निर्माण के बारे में हम आपको बताते हैं. ई आपको कोई पत्रकार आ इतिहासकार नहीं बताएगा. त्रेता जुग में मिथिला में महिसौल नाम का जगह हुआ करता था. सीता माता की जन्मस्थली से कोस-दो कोसभर की दूरी पर. प्रभु श्रीराम का बारात अयोध्या से निकलने वाला था. बारात में चतुरंगिणी सेना के साथ सैंकड़ो हाथी-घोड़ा भी चला. इतना विशाल बारात कइसे जाएगा..! महिसौल नगरी के वासियों को कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए. ई सब बात सोच के त्रेता जुग में महिसौल नगरी में उड़ानपुल बनाया गया. इसी उड़ानपुल से प्रभु श्रीराम का बारात गया और वापसी में जनकपुर धाम से माता सीता का विदाई हुआ.🐘🐎💂🏻♀
त्रेता जुग का उसी महिसौल को कलजुगहा सब "मेहसौल" के नाम से जानता है. और सीतामढ़ी नगरिया का अंग्रेज़ी पढ़ल-लिखल पब्लिक उड़ानपुल को "फ्लाईओवर" कहने लगा. इस "मेहसौल चौक" पर आजो उस उड़ानपुल का अवशेष बचा हुआ है. जानकी महोत्सव में इस पुल के अवशेष को देखने के लिए सीतामढ़ी में भारत के कोना-कोना से श्रद्धालु आते हैं. आम दिन में भी इस पुल के पास हजारों के संख्या में भीड़ देखा जा सकता है. भला हो सीतामढ़ी नगरीया के माननीय जनप्रतिनिधि महोदय सब का, जिनके कृपा से उस उड़ानपुल का अवशेष आजो सुरक्षित बचा हुआ है. हमारा पौराणिक-ऐतिहासिक विरासत बचा कर रखने के लिए हम जनप्रतिनिधि महोदय सबका पूरे सीतामढ़ी जिला की तरफ से आभार व्यक्त करते हैं..🙏🏻💐
हमारे विचार से इस पुल को चारों तरफ से अच्छे से घेराबंदी करके, चन्दन-टीका-अगरबत्ती लगाकर टूरिस्ट प्लेस बना देना चाहिए. हमारे दादा-परदादा बताते हैं कि इस उड़ानपुल में लाल चंदन लगाकर लाल कपड़ा बांधने से सारा मन्नत पूरा होता है. हम तो कल ही जा रहें हैं दर्शन करने आ मन्नत मांगने. बाकी आप सब अपना देख लीजिए. बोलिए सियावर रामचन्द्र की जय. महिसौल नगरिया के उड़ानपुल की जय.🙏




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